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Poems
युवा हमारा बहक रहा है
राष्ट्र हित में कर्तव्य
वोट की शक्ति
क्रिकेट का जोश निराला है
माँ-बाप बुढ़ापे में टूट रहे हैं
मैं कवि हूँ
कब तक तुम चुप बैठोगे
छात्रों में आत्म हत्याओं का दौर
मैं सेना का अमर जवान हूँ
प्रकृति पूछ रही है
नेत्र ज्योति को अर्पण कर दो
पिता के जैसा साथ नहीं
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